महिमा भारत भुइँया के

ये माटी म दया मया के बगरे हावे अंजोर हे
हमर धरती दाई के संगी दुनिया भर म सोर हे
ये  माटी म ......
ये धरती म जनमिन हावे रिषि मुनि अउ ग्यानी
सूर कबीरा तुलसी मीरा गुरुनानक के बानी
मंदिर मस्ज़िद गुरुद्वारा अउ गिरजाघर के बोल हे
हमर धरती दाई ......
गंगा यमुना कृष्णा कावेरी अउ सतलज के पानी
महानदी अउ अरपा पैरी गुरतुर बोले बानी
महासागर ह हिन्द के हमर सुघ्घऱ मारे हिलोर हे
हमर धरती दाई .....
देवी देवता इहिंचे आके अपन लीला देखाइन हे
संत महात्मा अपन ग्यान ले रद्दा सब ल देखाईन हे
दुनिया के हम गुरु कहाथन पत एखर बड़ जोर हे
हमर धरती दाई के .....
भगत राजगुरु सुखदेव जइसन अमर हमर बलिदानी हे
दादू तुकड़ो तुकाराम अउ सहजो जब्बर ग्यानी हे
लक्ष्मी दुर्गा अउ पृथ्वीराज के गजब के ललकार हे
हमर धरती दाई के ....
ये धरम धाम के भुइँया हे ये अक्षरधाम के भुइँया हे
ये अमरधाम के भुइँया हे ये चारों धाम के भुइँया हे
सत्य दया अउ क्षमा दान ह जिनगी के सिंगार हे
हमर धरती दाई के....
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कवि
गजेन्द्र हरिहारनो " दीप "
डोंगरगाँव
जिला - राजनांदगाँव
छत्तीसगढ़
रचना - छत्तीसगढ़ी भाषा में
गीत का भाव
इस गीत में भारत माँ की महिमा का बखान किया गया है । यही वो धरती है जहाँ विज्ञ ऋषि मुनि ज्ञानी  संत महात्मा भक्त आदि ने जन्म लिया । विभिन्न धर्मावलंबियों से सुसज्जित है हमारी धरती । यही वो धरती है जहाँ देवी देवताओं ने अवतार लेकर अपनी लीलाओं के माध्यम से विश्व का मार्गदर्शन किया ।
 
आज़ादी के लिए अपना  बलिदान करने वाले शहीदों की है ये धरती ।
भारत माँ। का कण कण वंदनीय है ।

संक्षिप्त परिचय
नाम - गजेन्द्र हरिहारनो " दीप "
संप्रति - शासकीय उच्च प्राथमिक शाला खुज्जी में उच्च वर्ग शिक्षक
अध्यक्ष शिवनाथ साहित्य धारा डोंगरगाँव
सह संपादक - मानस मञ्जूषा
प्रान्तीय सचिव- श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान छत्तीसगढ़