***********************
-: दोहा :-
***********************
-- शब्द --
***********************
शब्द हृदय में घर करे, शब्द हृदय में घाव ।
सबके हिय में मानिए, करता शब्द प्रभाव ।।
************************
शब्द ब्रह्म का रूप है, बोलें सोच -विचार।
शब्दों से दूरी बढ़े, शब्द बढ़ाए प्यार ।।
************************
शब्दों की हो साधना, शब्दों का ही ध्यान।
शब्दों में ही जग बसे, शब्दों में भगवान।।
***********************
मीठे शब्दों से सदा, वाणी में रस घोल।
जीवन में बस 'दीप 'तू , मीठी वाणी बोल।।
************************
भारी पड़ता है कभी, शब्दों का जंजाल।
क्लिष्ट शब्द को छोड़कर, सरल शब्द को ढाल।।
************************
शब्द बढ़ाए प्रीत को, शब्द जगाए शूल।
एक करे अनुकूलता, एक करे प्रतिकूल ।।
***********************
शब्द जगाये प्रेम को, शब्द कराये युद्ध।
शब्दों की महिमा बड़ी , शब्द बनाये बुद्ध ।।
***********************
🙏🙏🙏🙏
गजेन्द्र हरिहारनो "दीप"डोंगरगाँव, जिला राजनांदगाँव,छत्तीसगढ़
सर्वथा मौलिक सृजन
Social Plugin