तपती
दुपहरी में
खुले
सिर
नंगे
पैर
पसीने
से लथपथ
चला
जा रहा है
कोई
श्रम पुजारी
भविष्य
के
ताने
- बाने
बुनते
हुए
कोई
गीत
ज़िन्दगी
का
गुनगुनाते
हुए
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दुनिया के सभी मेहनतकश श्रमिक साथियों को सादर नमन
गजेन्द्र हरिहारनो " दीप "
डोंगरगांव, जिला - राजनांदगांव छ. ग.
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