🙏🙏 गंगा🙏🙏
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कितनी निर्मल,कितनी पावन,
है अपनी ये गंगा ।
सबको पावन कर देती है,
न्यारी अपनी गंगा ।
कितनी निर्मल ........
भगीरथी ने अपने तप से,
धरती पर है लाया ।
अपने सारे पितरों को तो,
उसने पार लगाया ।
भगीरथी के पीछे चलकर,
सागर पहुँची गंगा ।
सबको पावन ......
शंकर जटा समाई वह तो,
विष्णुपदा कहलाती ।
त्रिपथगामिनी सुरसरिता है,
तीनों लोक समाती ।
जो भी डुबकी लेता इसमें,
तारे सबको गंगा ।
सबको पावन ........
🙏🙏
गजेन्द्र हरिहारनो "दीप"डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
सर्वथा मौलिक सृजन
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